कहार समाज ने खेली लट्ठमार, छड़ीमार होली, छाया ब्रज सा उल्लास
कहारवाड़ी से शिप्रा तट तक निकला भव्य ध्वज चल समारोह, वरिष्ठों का सम्मान कर ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्ति के रंगों में सराबोर हुए श्रद्धालु

उज्जैन। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में इस वर्ष होली का पर्व बिल्कुल उसी अलौकिक और भव्य स्वरूप में मनाया गया, जैसा उत्साह मथुरा-वृंदावन की गलियों में देखने को मिलता है। वर्षों से चली आ रही प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए शहर पूरी तरह से भक्ति और गुलाल के रंगों में सराबोर नजर आया।
जीवंत हुई ब्रज और अवंतिका की सांस्कृतिक एकता
श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिस प्रकार वृंदावन में कान्हा और राधा रानी के संग छड़ीमार होली का आनंद लिया जाता है, ठीक उसी परंपरा का निर्वहन उज्जैन में बाबा महाकाल के सानिध्य में पीढ़ी-दर-पीढ़ी किया जा रहा है। कहार समाज के अध्यक्ष शंकर चौहान ने बताया कि वृंदावन की लट्ठमार होली की तर्ज पर ही उज्जैन की कहारवाड़ी में ‘कहार समाज युवा समिति’ द्वारा वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए लट्ठमार व छड़ीमार होली खेली जाती है। ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के बीच हुआ यह उत्सव आस्था और सांस्कृतिक एकता का अनूठा प्रतीक बना।
शिप्रा तट तक निकला ध्वज चल समारोह
आयोजन के दौरान परंपरा के अनुसार समाज के सभी वरिष्ठजनों का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया गया। इसके पश्चात कहारवाड़ी से लेकर शिप्रा नदी तक एक भव्य ध्वज चल समारोह निकाला गया, जिसमें समाज के लोगों ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
इस भव्य आयोजन और ध्वज चल समारोह में मुख्य रूप से शंकर चौहान, रघुनाथ चौहान, अशोक कहार, लीलाधर कहार, अनिल कहार, प्रशांत चंदेरी, पुरुषोत्तम कहार, पुष्पेन्द्र कहार, गणेश कहार, प्रवीण कहार, जीतेन्द्र कहार, सतीश कहार, हीरामणि कहार, गोपी बाई कहार, राम कन्या बाई, सागर बाई, और अनीता बाई सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय रहवासी एवं समाजजन उपस्थित रहे।



