पाठशाला

माधव कॉलेज में महिला दार्शनिक परिषद के 16वें अधिवेशन का समापन; 11 राज्यों के प्रतिभागी हुए शामिल

प्रोफेसर शुक्ला बोले- दर्शनशास्त्र के माध्यम से समाज निर्माण का प्रयास है यह परिषद, स्मारिका 'जिजीविषा' का हुआ विमोचन

उज्जैन। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय माधव महाविद्यालय में आयोजित ‘भारतीय महिला दार्शनिक परिषद’ के तीन दिवसीय 16वें राष्ट्रीय अधिवेशन का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस गरिमामय अधिवेशन में 11 राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपनी हिस्सेदारी की और अत्यंत उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत किए।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रजनीश शुक्ला उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रोफेसर शुक्ला ने कहा कि भारतीय महिला दार्शनिक परिषद समाज में एक अनोखा प्रयोग है। हम सभी दर्शनशास्त्र के माध्यम से समाज निर्माण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं और इस अधिवेशन में प्रस्तुत किए गए शोध पत्र इसी दिशा में एक सार्थक कदम हैं।
‘हम पुरुषों के विरोध में नहीं, साथ मिलकर जगा रहे हैं महिलाओं को’
परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष (रांची) प्रोफेसर राजकुमारी सिन्हा ने अपने विचार रखते हुए स्पष्ट किया कि यह मंच कोई नारीवादी आंदोलन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम पुरुषों के विरोध में नहीं हैं, बल्कि हम उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। हम पुरुषों के साथ मिलकर ही महिलाओं को जगाना और सशक्त करना चाहते हैं।” इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री डॉक्टर विनीता अवस्थी ने भारतीय महिला दार्शनिक परिषद की मूल संकल्पना को विस्तार से प्रस्तुत किया। वहीं, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर पूनम सिंह ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में संपन्न हुए विभिन्न अकादमिक सत्रों और संगोष्ठी के महत्वपूर्ण निष्कर्षों पर प्रकाश डाला।
रामायण और महाभारत हमारे डीएनए में: डॉक्टर होलकर
परिषद की स्थानीय अध्यक्ष डॉक्टर आभा होलकर ने स्वागत वक्तव्य देते हुए वर्तमान परिवेश में संस्कृति के क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का पतन हुआ है और हमें इसे और आगे बढ़ने से हर हाल में रोकना होगा। रामायण और महाभारत हमारे डीएनए में रचे-बसे हैं; इन्हीं ग्रंथों की शिक्षा के आलोक में संस्कृति के क्षरण को रोकने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
श्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए तीन डॉक्टर हुईं पुरस्कृत
अधिवेशन के दौरान प्राचार्य डॉक्टर कल्पना सिंह ने 16वें अधिवेशन की शोध स्मारिका ‘जिजीविषा’ का विमोचन किया। इसके साथ ही डॉक्टर सोनी शर्मा की लिखित पुस्तक ‘पर्यावरणीय दर्शन’ का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में श्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए डॉक्टर कुमुदिनी पाठक, डॉक्टर प्रतिमा राय और उज्जैन की डॉक्टर किरण बंडेरिया को विशेष रूप से पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह की शुरुआत डॉक्टर नलिनी तिलकर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके पश्चात प्रख्यात नृत्यांगना हीना वासेन ने ‘शिवांजलि’ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर जफर महमूद ने किया और अंत में आभार अधिवेशन की संयोजक डॉक्टर शोभा मिश्रा ने व्यक्त किया। अधिवेशन के समापन की यह विस्तृत जानकारी डॉक्टर रफीक नागोरी ने दी।

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