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साहित्य गौरव: उज्जैन के व्यंग्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह को अखिल भारतीय हिंदी साहित्य व्यंग्य पुरस्कार

साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति (हैदराबाद) का निर्णय; कृति ‘चयनित व्यंग्य रचनाएँ’ का राष्ट्रीय स्तर पर हुआ चयन

उज्जैन। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उज्जैन का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित हुआ है। शहर के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह को साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति, हैदराबाद द्वारा वर्ष 2025 का ‘अखिल भारतीय श्री आचार्य कृष्णदत्त हिंदी साहित्य व्यंग्य लेखन पुरस्कार’ प्रदान करने की घोषणा की गई है।
यह सम्मान उनकी चर्चित कृति ‘चयनित व्यंग्य रचनाएँ’ के लिए दिया जा रहा है। समिति ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रविष्टियों का मूल्यांकन करने के बाद डॉ. सिंह के नाम पर मुहर लगाई। पुरस्कार स्वरूप उन्हें 11,000 रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट किया जाएगा।
व्यंग्य लेखन में स्थापित है डॉ. सिंह का नाम
व्यंग्यकार मुकेश जोशी ने बताया कि डॉ. हरीशकुमार सिंह हिंदी व्यंग्य की दुनिया में एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके योगदान को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
विशाल कृतित्व: अब तक उनके 9 व्यंग्य संकलन और व्यंग्य समालोचना सहित विभिन्न विषयों पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
संपादन कार्य: उन्होंने अनेक व्यंग्य संकलनों का कुशलतापूर्वक संपादन भी किया है।
अकादमिक महत्व: उनके साहित्य की प्रासंगिकता इतनी है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर) से उनके व्यंग्य लेखन पर शोध कार्य हो चुका है, जिस पर शोधार्थी को पीएचडी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्रदान की गई है।
पूर्व सम्मान: उन्हें पूर्व में मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद की प्रेमचंद सृजन पीठ से प्रतिष्ठित ‘कर्मभूमि सम्मान’ सहित कई अन्य राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
सम्मान समारोह: यह पुरस्कार हैदराबाद में आयोजित होने वाले एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया जाएगा।
साहित्य जगत में हर्ष की लहर
डॉ. सिंह की इस बड़ी उपलब्धि पर उज्जैन के साहित्यकारों और मित्रों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्हें शुभकामनाएँ देने वालों में प्रमुख रूप से प्रो. हरिमोहन बुधौलिया, डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, मुकेश जोशी, दिनेश दिग्गज, शशांक दुबे, संतोष सुपेकर, रमेशचन्द्र शर्मा, संदीप सृजन और अनिल कुरेल शामिल हैं।

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