सेहतनामा
आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज में 28वें डॉ. बी. मुखोपाध्याय पोस्टग्रेजुएट कोर्स का शुभारंभ
चिकित्सा शिक्षा में एआई और नई तकनीकों पर हुआ मंथन, ऑर्थोपेडिक्स के छात्रों का उत्तीर्ण प्रतिशत 60 तक पहुंचा

उज्जैन। आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को ऑर्थोपेडिक्स के 28वें डॉ. बी. मुखोपाध्याय पोस्टग्रेजुएट इंस्ट्रक्शनल कोर्स का औपचारिक उद्घाटन हुआ। 20 से 22 मार्च तक चलने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन विशेष रूप से ऑर्थोपेडिक्स के पोस्टग्रेजुएट छात्रों की क्लिनिकल समझ और सर्जिकल विशेषज्ञता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
नई तकनीकों और फेलोशिप पर जोर
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेशनल बोर्ड ऑफ मेडिकल साइंसेज की कार्यकारी निदेशक डॉ. मीनू बाजपेयी रहीं। उन्होंने नेशनल बोर्ड ऑफ मेडिकल साइंसेज का संक्षिप्त परिचय देते हुए चिकित्सा शिक्षा में एआई शिक्षण और निगरानी सहित सभी नई तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. बाजपेयी ने रीइम्प्लांटेशन की नई फेलोशिप शुरू करने की जानकारी दी और ऑर्थोपेडिक रिसर्च एंड एजुकेशन फाउंडेशन की गतिविधियों की सराहना की।
सर्जनों को आधुनिक ज्ञान देने के लिए हुई थी शुरुआत
इस अवसर पर डॉ. जॉन मुखोपाध्याय ने फाउंडेशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. बी. मुखोपाध्याय ने 1993 में इस पाठ्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य उस समय के ऑर्थोपेडिक सर्जनों को आधुनिक ज्ञान प्रदान करना था क्योंकि तब ज्ञानवर्धन के लिए कार्यशालाएं या सम्मेलन आयोजित नहीं होते थे। कोर्स डायरेक्टर और आयोजन अध्यक्ष डॉ. डी. के. तनेजा ने पाठ्यक्रम की उत्पत्ति और इसके व्यापक प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1997 से इस प्रकार के कोर्स निरंतर चल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप स्नातकोत्तर छात्रों का उत्तीर्ण प्रतिशत जो पहले मुश्किल से 15 से 16 प्रतिशत था वह अब बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
देशभर से आए विशेषज्ञों का हुआ स्वागत
आयोजन में आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. वी. के. महादिक ने भारत भर से आए सभी संकाय सदस्यों और प्रशिक्षुओं का आत्मीय स्वागत किया। उज्जैन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अजय खरे के अनुसार यह आयोजन युवा ऑर्थोपेडिक सर्जनों को विशेषज्ञों के साथ ज्ञान साझा करने का एक अनूठा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. विवेक सिंह ने आभार और धन्यवाद ज्ञापित किया।
इन गतिविधियों पर रहा विशेष फोकस
उद्घाटन के दिन नैदानिक मामलों पर विशेषज्ञों के बीच विस्तृत चर्चा और ऑर्थोपेडिक प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों पर विशेष फोकस रहा। इस महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रकाश बंगानी, डॉ. निर्भय श्रीवास्तव और डॉ. एस. के. लुनावत ने की।



