उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: मुआवजे को लेकर फिर भड़का किसानों का आक्रोश, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी का आरोप; सोमवार को वार्ता विफल होने पर मंगलवार से 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन

उज्जैन। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन उन्हें गुमराह कर रहा है। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड की तर्ज पर वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा तय नहीं किया जा रहा है और प्रशासन किसानों की मांगों की अनदेखी कर सीधे अवार्ड पारित करने की तैयारी में है।
किसानों के अनुसार, पूर्व में आभार और स्वागत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि यह किसानों की सरकार है और किसान कल्याण वर्ष में उन्हें कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा राशि देने की बात स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन किसानों की बात नहीं मान रहा है और किसानों के हित में निर्णय लेने के बजाय पिछले आठ दिनों से केवल समय निकाल रहा है।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे विकास के साथ हैं और चाहते हैं कि उचित मुआवजा देकर सड़क का निर्माण हो। लेकिन जिला प्रशासन ने जिस प्रकार से मुआवजे का आकलन किया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन स्वयं नहीं चाहता कि सड़क का निर्माण सुचारू रूप से हो।
मंगलवार से एक हजार किसान सपरिवार करेंगे प्रदर्शन
किसानों ने चेतावनी दी है कि इस मुद्दे पर सोमवार को वे जिला प्रशासन के साथ एक अहम बैठक करेंगे और अपनी मांगें रखेंगे। यदि सोमवार को प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो मंगलवार से लगभग एक हजार किसान सपरिवार ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ की तर्ज पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। किसानों ने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन और इसके परिणामों की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।



