जल संरक्षण का अभिप्राय प्रकृति का संरक्षण है: प्रो. पी.आर. व्यास
माधव कॉलेज में 'जल और लैंगिक' विषय पर कार्यशाला का आयोजन

उज्जैन। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय माधव महाविद्यालय के भूगोल विभाग में विश्व जल दिवस के अंतर्गत ‘जल और लैंगिक’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
प्रकृति और जल संरक्षण पर जोर
भूगोल विभाग एवं प्रकृति शोध संस्थान क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में प्राचार्य प्रो. कल्पना वीरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें उदयपुर के विषय विशेषज्ञ व भूगोलविद् प्रो. पी.आर. व्यास ने प्रकृति के संरक्षण, पंचतत्व का संरक्षण, बड़े शहरों के निर्माण और प्रति व्यक्ति जल की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने वर्तमान में मानव द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण तथा प्लास्टिक से जमीन, नदी, वातावरण, मिट्टी और जल के प्रभावित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रो. व्यास ने कहा कि मां गंगा का जल अमृत के समान है, परंतु हमें क्षिप्रा मैया के जल को प्रदूषण मुक्त करने हेतु अभियान चलाने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कहते हुए जल संरक्षण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही प्रकृति को सुरक्षित रखने और कृषि में ऑर्गेनिक फार्मिंग का उपयोग करने पर बल देते हुए उद्योगों के दूषित जल को नदियों में प्रवाहित न करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण का अभिप्राय ही प्रकृति का संरक्षण है।
भारतीय संस्कृति का अटूट अंग है जल
कार्यशाला में मध्य प्रदेश सामाजिक शोध संस्थान के एमेरिटस प्राध्यापक प्रो. वाय.जी. जोशी ने जल को भारतीय संस्कृति का अटूट अंग बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में सभी तीर्थ स्थल नदियों के किनारे बसे हुए हैं। इस्लाम में रोज़े को मानव शरीर के मरुस्थल में जीवन के अनुकूलन से जोड़ते हुए उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. जोशी ने बताया कि सभी धर्मों के पर्वों में प्रकृति के माध्यम से जल संरक्षण की शिक्षा मिलती है।
कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. मोहन निमोले द्वारा किया गया। अतिथि परिचय डॉ. नूतन पँवार ने दिया, जबकि संचालन डॉ. जफर महमूद ने किया। आभार डॉ. गणेश राठौड़ ने व्यक्त किया। कार्यशाला में शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय की भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमिला बघेल विशेष रूप से उपस्थित थीं।
इस अवसर पर भूगोल के सहायक प्राध्यापक प्रो. आनंद सिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में प्रकृति शोध संस्थान उदयपुर के अध्यक्ष द्वारा सदस्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और भूगोल विभाग द्वारा अक्टूबर 2026 में आयोजित होने वाली द्वितीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा भी तैयार की गई।



