महाकाल प्रांगण स्थित अति प्राचीन सती माता मंदिर में कन्या पूजन के साथ हुआ नवरात्रि पर्व का समापन
नौ दिनों तक चला माता का विशेष शृंगार और पूजन, निसंतान महिलाओं की गोद भराई की है विशेष मान्यता

उज्जैन। नवसंवत्सर और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण स्थित अति प्राचीन श्री सती माता मंदिर में नौ दिवसीय विशेष पूजन और अनुष्ठान का समापन हुआ। इस अवसर पर मंदिर के पुजारी चेतन शर्मा ने सभी देशवासियों को पारंपरिक हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।
अष्टभुजा और चारभुजा रूप में विराजमान हैं माता
पुजारी चेतन शर्मा ने मंदिर के इतिहास और महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि सती माता का यह अति प्राचीन मंदिर पूर्व में महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित था, जो अब प्रांगण में स्थित है। यहां माता का विग्रह स्वरूप अंदर से ही प्रकट हुआ है। मंदिर में माता अष्टभुजा के साथ-साथ चारभुजा स्वरूप में भी विराजमान हैं, जिनकी नियमित रूप से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
अष्टमी पर महाहवन और दशमी पर हुआ कन्या पूजन
परम्परा के अनुसार इस वर्ष भी नवरात्रि के पावन पर्व पर नौ दिनों तक प्रतिदिन माता का विशेष शृंगार, पूजन और हवन किया गया। सती माता मंदिर में वर्ष भर की चारों नवरात्रि में कन्या पूजन और भोजन का विशेष आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में, अष्टमी के दिन विश्व कल्याण की कामना से एक महाहवन किया गया, जो परम पूज्य बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। दशमी तिथि पर इस अनुष्ठान का विधिवत समापन कन्या पूजन के साथ हुआ। समापन के अवसर पर छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन प्रसादी ग्रहण कराई गई। इस संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान और कर्म में महाकालेश्वर मंदिर समिति का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
संतान प्राप्ति और अष्ट सौभाग्य की है मान्यता
सती माता मंदिर में दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। पुजारी चेतन शर्मा के अनुसार, यहां अष्ट सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता को कुमकुम अर्पण किया जाता है और बाद में उसी कुमकुम का वितरण भक्तों में किया जाता है। इस मंदिर की एक विशेष मान्यता यह भी है कि जो महिलाएं निसंतान होती हैं, उनकी यहां माता के आशीर्वाद से गोद भराई की जाती है, जिससे उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। माता के दरबार में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।



