धर्म-कर्म

उज्जैन में 17 मई से शुरू होगा आस्था का महाकुंभ: ज्येष्ठ अधिक मास में बन रहा दुर्लभ ‘लक्ष्मी नारायण योग’

मोक्षदायिनी नगरी उज्जैन में 17 मई से आस्था का महाकुंभ प्रारंभ होने जा रहा है

उज्जैन। मोक्षदायिनी नगरी उज्जैन में 17 मई से आस्था का महाकुंभ प्रारंभ होने जा रहा है। श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह के मध्य में आने वाले अधिक मास में पांच रविवार का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस विशेष संयोग के चलते दुर्लभ ‘लक्ष्मी नारायण योग’ का निर्माण हो रहा है। यह पवित्र पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा।
84 महादेव और नारायण मंदिर की यात्रा से मिलेगा चारों धाम का पुण्य
सप्तपुरियों में से एक और महाकालेश्वर की विश्व प्रसिद्ध नगरी उज्जैन में शिव और विष्णु उपासना की प्राचीन परंपरा रही है। लोकमान्यता है कि इस पवित्र मास में लीला पुरुषोत्तम नारायण मंदिर और 84 महादेव मंदिरों की यात्रा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को चारों धाम की तीर्थयात्रा के समान पुण्य फल मिलता है। इस दौरान यहां के प्राचीन सरोवरों, देवालयों और साधना स्थलों पर आराधना का विशेष महत्व रहेगा।
खगोलीय गणना: कैसे बनता है अधिक मास?
वैदिक पंचांग गणना के अनुसार, चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन और सौर वर्ष 365 दिन का होता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिन का अंतर रहता है। यह अंतर हर वर्ष जुड़कर 32 माह, 16 दिन और 8 घंटे के अंतराल में एक पूरा अतिरिक्त चंद्र मास बन जाता है। इसी खगोलीय संतुलन को बनाए रखने के लिए हर 32 से 33 महीने में पंचांग में एक अतिरिक्त चंद्र मास जुड़ता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहा जाता है।
मलमास से ‘पुरुषोत्तम मास’ बनने की पौराणिक कथा
ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुरुआत में इस अतिरिक्त मास का कोई स्वामी नहीं था और देवताओं ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसे मलमास कहकर शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया। इस तिरस्कार से दुखी होकर जब यह मास भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा, तब श्रीहरि ने इसे अपना स्वरूप और नाम प्रदान किया। भगवान विष्णु ने कहा कि अब से यह मास मेरा स्वरूप होगा और ‘पुरुषोत्तम मास’ कहलाएगा। इसी वरदान के बाद से यह मास अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना जाने लगा।

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