सिंहस्थ से पहले एक लाख वृक्ष तैयार करने का संकल्प, चरक वाटिका में किया हजारों पौधों का संरक्षण
निरंकारी मिशन और वृक्ष मित्र सेवा समिति का संयुक्त अभियान, नन्हे पौधों को दी खाद और पानी

उज्जैन। आगामी सिंहस्थ से पहले शहर में एक लाख वृक्ष तैयार करने के लक्ष्य के साथ रविवार को वृक्ष मित्र सेवा समिति और संत निरंकारी मिशन ने संयुक्त रूप से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। संत निरंकारी मिशन के ‘वन नेस वन’ और समिति के ‘हर संडे 2 घंटे’ अभियान के तहत विक्रम विश्वविद्यालय की चरक वाटिका में पूर्व में रोपे गए हजारों पौधों का संरक्षण किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने मिलजुलकर नीम के नए पौधे भी लगाए।

मीडिया सहायक विनोद गज्जर और जितेश बत्रा ने बताया कि माता सुदीक्षा जी और रमित जी के मार्गदर्शन में मिशन द्वारा जल, थल और वायु संरक्षण को लेकर वर्षभर सेवा कार्य किए जाते हैं। रविवार, 31 मई को लगभग दो दर्जन निरंकारी भक्तों ने चरक वाटिका पहुंचकर पौधों के आसपास से खरपतवार हटाई तथा उन्हें खाद और पानी दिया। इसका मुख्य उद्देश्य पौधों को रोपने के बाद उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजना है, ताकि वे अपना वास्तविक रूप धारण कर सकें और आने वाली पीढ़ी को शुद्ध वायु का लाभ मिले।
वृक्ष मित्र सेवा समिति के अजय भातखंडे ने बताया कि रविवार को चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत निरंकारी मिशन के सहयोग से नन्हे पौधों को संवारने का कार्य किया गया। उन्होंने बताया कि पूरे उज्जैन में सिंहस्थ से पूर्व एक लाख वृक्षों को तैयार करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है, जिसमें शहर के प्रोफेसर, डॉक्टर और समाजसेवियों सहित अनेक गणमान्य नागरिक निरंतर अपना योगदान दे रहे हैं।
पौधे बच्चों की तरह होते हैं, उनकी परवरिश जरूरी
पौधों के संरक्षण के पश्चात पंवासा स्थित संत निरंकारी भवन में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें उज्जैन मुखी त्रिलोक बेलानी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पौधे बिल्कुल बच्चों की तरह होते हैं। जिस प्रकार बच्चों की अच्छी परवरिश कर उन्हें बड़ा किया जाता है, उसी तरह पौधों को रोपकर उनका उचित पालन-पोषण करना भी आवश्यक है। आज इसी संकल्प के साथ पौधों को खाद-पानी देकर संरक्षित किया गया है। इस सत्संग में सैकड़ों की संख्या में निरंकारी भक्त उपस्थित रहे।



