धर्म-कर्म

रक्षाबंधन विशेष: भाई से पहले भगवान को बांधें राखी, जानें पूजा का सही और शुभ क्रम

राखी बांधने का सही और मंगलकारी क्रम

रक्षाबंधन भाई-बहन के अगाध प्रेम और रक्षा के संकल्प का पावन पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन, हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार भाई से पहले देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। आइए जानते हैं राखी बांधने का सही और मंगलकारी क्रम क्या होना चाहिए।

1. सबसे पहले श्री गणेश को अर्पित करें राखी

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ माना गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उन्हीं की पूजा से होती है।

रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले गणपति बाप्पा का पूजन करें।

उन्हें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।

इसके बाद ही सबसे पहला रक्षा सूत्र (राखी) भगवान गणेश को बांधें।

2. इसके बाद लड्डू गोपाल को बांधें रक्षा सूत्र

गणेश जी की पूजा के बाद घर के मंदिर में विराजमान लड्डू गोपाल (भगवान कृष्ण) को राखी बांधने की परंपरा है।

भगवान कृष्ण को रक्षा सूत्र अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

इसी समय आप अपने घर के मंदिर में मौजूद अन्य देवी-देवताओं को भी रक्षा सूत्र अर्पित कर सकते हैं।

3. देवी-देवताओं के बाद भाई की कलाई पर सजाएं राखी

ईश्वर का आशीर्वाद लेने के बाद भाई को राखी बांधने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके लिए इस विधि का पालन करें:

आसन: भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की चौकी पर बैठाएं।

तिलक: सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम (रोली) और अक्षत का तिलक लगाएं।

आरती और राखी: भाई की आरती उतारें और उसकी कलाई पर राखी बांधें।

मुंह मीठा: अंत में भाई को मिठाई खिलाकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें।

संकल्प: इसी दौरान भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।

यह क्रम क्यों माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी मांगलिक कार्य से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना उस कार्य को सफल और मंगलकारी बनाता है। रक्षाबंधन पर भी इसी भाव के साथ सबसे पहले ईश्वर को रक्षा सूत्र बांधकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है, ताकि भाई-बहन के रिश्ते पर हमेशा ईश्वरीय कृपा बनी रहे और उनका जीवन संकटों से मुक्त रहे।

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