मन की शुद्धि के बिना अपरस की सेवा सच्ची नहीं, वल्लभ वैष्णव मंडल ने मनाया पवित्रा बारस उत्सव
खंडइंदौर के मुखिया अनुराग जी ने दिया व्याख्यान, 42 गुसाईं बालकों के चित्रों पर किया गया मिश्री का भोग अर्पण

उज्जैन। श्री वल्लभ वैष्णव मंडल, युवा मंडल और महिला मंडल द्वारा शहर की खंडेलवाल धर्मशाला में पवित्रा बारस उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंडल के संस्थापक संयोजक विट्ठल नागर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में इंदौर के मदन मोहन जी मंदिर से पधारे मुखिया श्री अनुराग जी ने विशेष व्याख्यान दिया।
मीडिया प्रभारी दीपक राजवानी ने बताया कि जिन वैष्णवों ने ब्रह्म संबंध लिया है, उन्होंने भूतल पर विराजित और लीला में प्रवेश कर चुके 42 गुसाईं बालकों के चित्रों पर कंकू तिलक लगाकर पवित्रा धराई और मिश्री का भोग अर्पित किया। इसके साथ ही महाप्रभु जी के स्वरूप पर भी सभी ने पवित्रा धराई और भोग लगाया।
वैष्णवों के लिए होती हैं तीन दीपावली
अपने आशीर्वचन में मुखिया अनुराग जी ने कहा कि केवल ब्रह्म संबंध लेने से ही कोई वैष्णव नहीं बन जाता। ब्रह्म संबंध का पालन करना और अंतरात्मा की शुद्धि के साथ अपरस करने पर ही प्रभु की सच्ची सेवा होती है। यदि मन पवित्र और शुद्ध नहीं है, तो केवल स्नान कर धुले वस्त्र पहनकर की गई अपरस सेवा सच्ची नहीं है। उन्होंने बताया कि वैष्णवों की तीन दीपावली होती है। पहली सावन मास की पवित्रा बारस, दूसरी जन्माष्टमी और तीसरी देव दीपावली। कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ों वैष्णवों ने मुखिया जी के विचारों को सुना और उनके बताए नियमों पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।
पुष्टिमार्ग का प्राकट्य दिवस है पवित्रा बारस
पवित्रा बारस के पावन दिन श्रावण शुक्ल द्वादशी संवत् 1549 को श्री महाप्रभुजी श्री वल्लभाचार्य ने अपने प्रथम भक्त श्री दामोदरदास हरसाणीजी को पहली बार ब्रह्म संबंध की दीक्षा दी थी। इस प्रसंग के साथ ही पुष्टिमार्ग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे पुष्टिमार्ग के प्राकट्य दिवस के रूप में देखा जाता है। इस दिन वैष्णव भक्त अपने गुरुदेव और ठाकुरजी को सूत, रेशम या स्वर्ण-रजत के धागों से बने विशेष पवित्रा अर्पित करते हैं। यह पर्व जीव के परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा-भाव को दृढ़ करने का संदेश देता है।
इन आचार्यों और गुसाईं बालकों को लगाया गया भोग
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठों, मार्गदर्शकों, परामर्शदाताओं और संचालक मंडल ने मुखिया जी को उपरना पहनाकर सम्मानित किया। मुखिया जी ने भी सभी को उपरना पहनाकर दीर्घायु का आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का संचालन विट्ठल नागर ने किया और आभार आनंद पुरोहित ने माना।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर इन गुसाईं बालकों व आचार्यों का पूजन कर भोग लगाया गया:
श्री विट्ठलेश जी काका जी, श्री वल्लभराय जी सूरत, श्री विनय बाबा कोटा, श्री बृजोत्सव जी इंदौर, श्री राकेश बाबा नाथद्वारा, पूज्यपाद गोस्वामी श्री 108 गोविंद राय जी महाराज, श्री विशाल बाबा नाथद्वारा, पूज्य श्री दाऊजी महाराज, पूज्यपाद श्री 108 बृजेश कुमार जी महाराज, पूज्यपाद श्री विट्ठलेनाथ जी महाराज, पूज्यपाद श्री श्याम मनोहर जी महाराज, पूज्यपाद श्री दामोदरदास जी महाराज, पूज्यपाद 108 परेश जी महाराज, श्री मुकुंद राय जी महाराज, श्री मुरली मनोहर जी मुम्बई बड़ा मंदिर, पूज्यपाद श्री बृज अलंकार महाराज, पूज्यपाद श्री कमलेश कुमार जी महाराज, गोस्वामी श्री गोवर्धनेश जी महाराज, श्री कल्याण राय जी इंदौर, श्री गोकुलोत्सव जी इंदौर, श्री हरि राय बाबा इंदौर, श्री द्वारकेश लाल जी महाराज, पूज्यपाद श्री द्वारकेश जी महाराज, प्रथमेश जी, देवकी नंदन महाराज इंदौर, पूज्यपाद 108 श्री सुरेश कुमार जी महाराज, पूज्यपाद गोस्वामी 108 श्री शिशिर कुमार जी महाराज, उज्ज्वल गोस्वामी श्री रमेश कुमार जी महाराज, पूज्यपाद 108 श्री कृष्णा राय जी महाराज, पूज्यपाद 108 श्री गोपाल राय जी महाराज, पूज्यपाद श्री प्राण वल्लभ बाबा, पूज्यपाद 108 श्री गिरधरलाल जी महाराज, पूज्यपाद 108 मुरलीधर जी बाबा, पूज्यपाद 108 श्री यदुनाथ जी महाराज, पूज्यपाद 108 श्री बृजराज कुमार जी महाराज, पूज्यपाद गोस्वामी 108 श्री माधवराव जी महाराज, पूज्यपाद 108 श्री नीरज कुमार जी महाराज और पूज्यपाद 108 श्री पुरुषोत्तम लाल जी।
कार्यक्रम में विशेष रूप से नुपुर नीमा, अमित नागर, राजेंद्र शाह, विशाल नीमा, पारूल शाह, मनीष नागर, परेश नीमा, कामिनी शाह, निरंजन माहेश्वरी, जयेश श्रॉफ, दीपेश शाह, मनीष नागर, नितिन नीमा, अमर दिसावल, आभास शर्मा, राहुल नागर, नरसिंह नीमा, विजय जोशी, आशीष दिसावल, प्रमोद नीमा, सुनीता मूले और अर्चना गुप्ता सहित वैष्णव जनों का सहयोग रहा।



