समाज संसार

116वें वर्ष में महाराष्ट्र समाज की ऐतिहासिक गैर कल, नासिक के ढोल-ताशों की गूंज से होगा नवसंवत्सर का स्वागत

सुबह तिलक स्मृति मंदिर में होगी गुड़ी उभारणी, शाम को रामघाट पर क्षिप्रा जल के स्पर्श के बाद निकलेगा चल समारोह

उज्जैन। वर्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर 19 मार्च को महाराष्ट्र समाज द्वारा शहर में पारंपरिक गैर निकाली जाएगी। महाराष्ट्रियन ब्राह्मण समाज की गैर की यह अत्यंत प्राचीन परंपरा इस वर्ष अपने 116वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस भव्य आयोजन में समाजजन भारी संख्या में एकत्रित होकर शक्ति और एकता का प्रदर्शन करते हुए नवसंवत्सर का स्वागत करेंगे।
सुबह गुड़ी उभारणी व ध्वजारोहण
तय कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार सुबह 9 बजे क्षीरसागर स्थित तिलक स्मृति मंदिर समाज भवन में गुड़ी उभारणी का मुख्य कार्यक्रम संपन्न होगा। इसके पश्चात सुबह 10 बजे पानदरीबा स्थित गणपति मंदिर पर पवित्र ध्वज, पवित्र लिग्गी एवं निशान का विधि-विधान से ध्वजारोहण किया जाएगा।
शाम को निकलेगा भव्य चल समारोह
शाम 7 बजे पवित्र ध्वजों एवं निशान का पूजन कर उन्हें चल समारोह के रूप में रामघाट ले जाया जाएगा। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां क्षिप्रा के पवित्र जल का स्पर्श कराने के बाद गैर शहर के प्रमुख मार्गों की ओर प्रस्थान करेगी। यह चल समारोह दानीगेट, ढाबा रोड, छत्रपति, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुजरी बाजार और बक्षी बाजार होते हुए वापस पानदरीबा पहुंचेगा, जहां गैर का विधिवत समापन होगा।
नासिक का 52 सदस्यीय दल रहेगा आकर्षण
इस ऐतिहासिक गैर का मुख्य आकर्षण नासिक से आया विशेष दल रहेगा। इस दल के 52 कलाकार दुंदुभी, ढोल-ताशा और बैंड के नाद से पूरे मार्ग को गुंजायमान करेंगे।

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