मैकाले की शिक्षा पद्धति छोड़ देश में फिर अपनानी होगी गुरुकुल परंपरा
श्री श्याम बालाजी धाम में 40 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार, स्वामी भागवतानंद गिरि ने दिया आगामी सिंहस्थ का आमंत्रण

उज्जैन। श्री श्याम बालाजी धाम में संचालित गुरुकुल के नए सत्र के प्रारंभ पर 40 बटुक विद्यार्थियों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। पालकों की उपस्थिति में यज्ञ, हवन, पूजन और हिमाद्री स्नान के साथ यह अनुष्ठान किया गया।
इस अवसर पर श्री श्याम बालाजी धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भागवतानंद गिरि भगवान बापूजी ने शिक्षा प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि आज मैकाले की शिक्षा पद्धति से हटकर गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनः लागू करने की आवश्यकता है। गुरुकुल में ही विद्यार्थियों के भीतर भारतीय संस्कार, संस्कृति और भारत माता के प्रति अटूट श्रद्धा का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने उज्जैन के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान महाकाल की यह नगरी अनादि काल से गुरुजनों की तपोभूमि रही है। यहां पूज्य महर्षि सांदीपनि जैसे महान गुरु रहे हैं, जिनके आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ रहकर मात्र 64 दिन में 64 कलाओं का अध्ययन किया था।
डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में खास होगा सिंहस्थ
अपने उद्बोधन में स्वामी जी ने उपस्थित भक्तों को आगामी सिंहस्थ कुंभ में आने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रशासन द्वारा विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जिसके चलते इस बार का कुंभ बहुत विशेष और भव्य होगा। भगवान शरण जन कल्याण सेवा समिति के विशेष सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम श्री महादेव वेदांत गुरुकुल के आचार्य राहुल व्यास के आचार्यत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की जानकारी ट्रस्ट अध्यक्ष महंत हिरदेश गुरुजी ने दी।



